After state election of 2010,A new era of bihar has been started.Before the election,whole india was looking bihar as caste based state but this election has proved that people of bihar have waked up.Now they want progressive government which can fulfill need  of a ground level people.In the month of November,i was in south india.I saw, people of south india who have come to gaya,rajgir & nalanda they were appreciating the work done by government bihar.Now time has come to come out from all caste based politics and join hand for development.

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Comment by RAJKUMAR SINGH on December 27, 2010 at 3:46pm
सही आकलन है आपका अभिषेक . अगर गंगोत्री पवित्र हो जाये तो ' गंगा प्रदूषण ' राजनैतिक इक्षा शक्ति और जनबल से समाप्त करने की संभावना बढ़ा देती है .जिस प्रदेश का चुना हुआ प्रथम सेवक डंके की चोट पर कहे की " ऐसी टकसाल नहीं बनी जो मुझे खरीद सके " तो नौकरों चाकरों की क्या औकात की नहीं सुधारे जा सकते ? और आपने सही कहा की अल्पसंख्यक  ही  सही , इमानदार और मेहनती सेवकों की भी इतनी कमी नहीं होती की सिस्टम पर लगाम न कसी जा सके .हाँ जब शीर्ष ही उसे और उसकी इमानदारी को ही ' गुनाह ' मान प्रताड़ित भी करे तो अच्छे अच्छे साहसी भी ' हतबल ' हो जाते हैं . और जहां तक दूर पास से और अपने विश्वास से देख पा रहा , हूँ ऐसे प्रसासनिक सेवकों का यह ' सुशासन ' एहसानमंद भी होगा और उनकी ताकत भी .
Comment by Abhishek on December 27, 2010 at 1:07pm
दिगर है, जब डंडा पड़ेगा तो दुःख और दर्द तो होगा ही, भले ही वो अवांछित हो| और यह भी स्वाभाविक है कि इनकी लामबंदी भी अवश्य होगी| होता है तो हो| जब तक ये नौकरशाह अपने पद पर बने हैं इनकी कोई भी अवांछित कृत इनके पदेन कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के विपरीत जाएगी और वे मह्कमी कारर्वाही के हक़दार होंगे|
साथ ही, यह भी सत्य है कि पूरी नौकरशाही अभिशप्त और कुंठित नहीं| हाँ इतना जरुर है कि ईमानदार और मेहनती अधिकारी अल्पसंख्यक हो सकते हैं| तो क्या हुआ? पैरेटो साहब तो बता कर गये ही हैं कि बहुसंख्यकों का योगदान न्यूनतम होता है|
तो सारांश यही है कि या तो अधिकारीगण अपनी जिम्मेदारी समझें या फिर अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए कमर कस लें| पांच साल का अंतराल बहुत होता है ऐसे नौकरशाहों को पहचानने और ठिकाने लगाने के लिये| बाकी, जनता में तो इनकी कोई पैठ नहीं होती| रही सिस्टम की बात, तो सिस्टम खुद इनका शिष्टाचार करने में समर्थ होना चाहिये|
Comment by RAJKUMAR SINGH on December 27, 2010 at 12:31pm

अगर नतीजों की ठीक पड़ताल करें तो एक सुखद सच्चाई उजागर हो रही है .विश्लेषण बताते हैं की बिहार के युवाओं ने तथा खास कर महिलाओं ने पुराने ढर्रे ,जाती धर्म आदि को तोड़ कर ' विकास ' और सुशासन चुना है . बिहार के युवा ही इस ' क्रांति ' के वाहक भी होंगे .नितीश के नेत्रित्व को यदि युवाओं की जमीनी ताकत मिले तो अब यह कदमताल ' क्रांति ' को उस ऊँचाई तक ले जायेगी की बस दुनियां देखेगी .

नितीश ने ' भ्रष्टाचार से सीधे सीधे युद्ध का ऐलान किया है ' .यह उम्मीद है आप सब ने पढ़ा सुना देखा होगा .सबको इस निर्णायक लडाई में भागीदार होना पड़ेगा .जिताना तो पहला चरण है .मत भूलें की भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए राजनैतिक इच्छा शक्ति के साथ ही जमीनी स्तर पर हर एक जागरूक नागरिक को साहसी सिपाही भी बनना पड़ेगा .सिस्टम के भीतर की ' नौकर शाही ' की ताकत को कम न आँकिए .जब भ्रष्टाचारियों की संपत्ति छीन उन्हें नितीश ने स्कूलों में बदलना शुरू किया है तो वे ' नौकरशाही ' , जिसका स्वरुप हम सब जानते हैं ,के स्वाभाविक ' वर्ग शत्रु ' भी बन रहे हैं . विकास -यात्रा को रोकने वाली ताकतों को भी चिन्हित कर लें और हर स्तर पर हराते जाएँ .' सुशासन की ' इक्षा शक्ति ' के वाहक बनें  हम . 



Comment by Shalu Sharma on December 27, 2010 at 3:49am
Bihar is definitely developing in context to India. However some learned fellows like to make fun from a distance because they don't really understand the grown reality. Instead of actually doing anything, its much easier to talk and do nothing and watch the drama.

Comment by Abhishek on December 27, 2010 at 1:45am
२०१० बिहार चुनाव परिणाम ने सिद्ध किया है कि बिहार की जनता और नीतिश भाई एक-दूसरे के परिपूरक हैं| वो इस तरह कि बिहार कि जनता बहुत पहले ही उब चुकी थी और विकासोन्मुख परिवर्तन चाहती थी| और तभी नीतिशजी ने जनता को एक विकल्प दिया| जनादेश को गर पढ़ सकें तो एकमात्र सन्देश यही आता है कि बिहारी मानसिकता, तमाम "वाद" के बावजूद अब बिहारवाद की तरफ आमुख है| शैशवावस्था में होने के कारण कभी ये बिहारवाद लडखडाये भी तो उसे गिरने नहीं देना है| इस नाते नीतिशजी आर उनकी टीम की जिम्मेदारी हिमालय की तरह उन्मुख और कठोर है| आशा है वे लोगों की आशाओं पर खरे उतरेंगें| और देश के सामने एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करेंगे| धन्यवाद्|

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