गद्दार सरकार का झूठा सरदार (?)

गद्दार सरकार का झूठा सरदार

एक खबर या बयान जो भी आप चाहें कह लें ,अख़बारों में आपने भी पढी होगी या धिन्धोराची टी वी चैनलों पर देखी होगी .
भ्रष्टाचार और घपलों घोटालों से घिरी यूपीए सरकार के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद को आश्वस्त किया है कि वे न सिर्फ अपनी सरकार को भ्रष्टाचार मुक्त करेंगे बल्कि सार्वजनिक जीवन में भी शुद्धता लाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे. भ्रष्टाचार के आरोपों में जिसे भी दोषी पाया जाएगा उनको पूरा दण्ड दिया जाएगा.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का यह आश्वासन इस स्वीकारोक्ति के साथ आया है कि टेलिकॉम और कॉमनवेल्थ खेल ऐसे दो क्षेत्र हैं जिनमें कुछ ऐसा हुआ है जो दुर्भाग्यपूर्ण है. सदन को आश्वस्त करते हुए मनमोहन ने कहा कि उनकी सरकार जांच एजंसियों के साथ पूरी तरह से सहयोग करेगी ताकि सत्य सुरक्षित रह सके और दोषियों को सजा मिल सके.
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा में चली बहस का जवाब देते हुए मनमोहन सिंह ने यह भी आश्वासन दिया कि विदेशों में रखे काले धन को वापस लाने के लिए वे पूरी कोशिश करेंगे.  विपक्ष को आश्वासन दे दिया कि इस मसले पर हम और आप एक हैं. 

लेकिन अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री ने अपने उस बयान का उल्लेख आज नहीं किया जिसमें उन्होंने देशों के साथ हुई संधियों का हवाला देकर काले धन की वापसी को मुश्किल बताया था. आज तो वे विपक्ष के भी विपक्ष नजर आने लगे लेकिन क्योंकि सरकार में हैं इसलिए कुछ सेफगार्ड तो रखने ही पड़ते हैं. इसलिए साथ में यह भी जोड़ दिया कि मामला दो पांच साल पुराना नहीं है इसलिए वक्त लगेगा.
प्रेस से बात करते हुए उन्होंने भले ही बहुत शील संकोच में बातें जनता के सामने रखीं हों लेकिन संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने परत दर परत, प्वाइंट दर प्वाइंट अपनी सफाई रखी और ज्यादा बड़ी लक्ष्मण रेखा खींचते हुए संसद को आश्वस्त किया कि सरकार ही नहीं वे तो सार्वजनिक जीवन में सुचिता लाने की कोशिश करेंगे. उनकी कोशिश रंग लाए तो भला जनता को क्या ऐतराज लेकिन ......................

गद्दार सरकार का यह झूठा और बेशर्म ' सरदार ' कोई नयी बात नहीं कर रहा .एक वक्त इसने नरसिम्हा राव सरकार से इस्तीफ़ा देते हुए कहा था की " सीज़र की पत्नी को भी संदेह के परे होना चाहिए ".उस वक्त सोनिया के इशारे पर नरसिम्हा राव को कमजोर करने के लिए इसके आदर्शवादी ' पैंतरे ' को मेरे सहित देश ने भी इसमें इमानदारी देखी थी और बाद में इसके प्रधान मंत्री बनने पर एक उम्मीद भी जगी थी .लेकिन .........
 

सौ दिनों में देश का विदेशों में जमा काला पैसा लाने की बात की थी इसने पिछले आम चुनाव में . डेढ़ साल हो गए क्या किया ? ऊपर से और घोटाले पे घोटाले .कई इसे व्यक्तिगत इमानदार कहते हैं .तब तो मूर्ख भी हुआ भ्रष्टाचारियों को बचा कर और अपनी ' इम्पोर्टेड रानी '  का सिर्फ एक चाकर बन कर ,जिसके इशारे और षड्यंत्र का यह मुखौटा भर है .या कुर्सी का ऐसा मोह की अपनी रानी के लिए सब गालियाँ बेशर्मी से खाने को तैयार . इसका अर्थशास्त्र विदेशी ताकतों की दलाली है .भारत के करोड़ों मेहनतकश घरों के चूल्हों को ठंढा करने की कीमत पर .ये जो भी वादे करे उसे न सिर्फ झूठ समझा जाये बल्कि उसका उल्टा करने का पक्का इरादा माना जाये .
कल लोकसभा की लाइव टेलीकास्ट में इसका और इसकी आका का बेशर्म चेहरा देखने लायक था .
 

डा.लोहिया और जय प्रकाश ने कहा था " जिंदा कौमे पांच साल इंतजार नहीं करतीं " . उठो मेरे देश और सत्ता से हटा इस गद्दार जनद्रोही ,देशद्रोही सरकार को जेल में ठूँस दो या सड़क पर नंगा कर घुमाओ .अब इन  ' गांधीयों ' से देश को बचने बचाने के लिए गाँव ,गली ,सड़कों पर उतरना होगा .मिस्र और ट्युनिसिया की तरह उठना होगा .अब एक नयी क्रांति के बिना देश का कुछ नहीं हो सकता .क्या देश की जनशक्ति,खास कर ' युवाशक्ति ' सुन रही है ?
मैं अच्छी तरह ' राजद्रोह ' की परिभाषा जानता हूँ जिसके लिए मुझे आजीवन कारावास तक मिल सकता है या फाँसी भी ,१९६२ में लार्ड मैकाले के बनाये ' भारतीय (?)दंड संहिता ' के तहत ,जो देश को गुलाम बनाये रखने के औजार की इजाद थी .बताता चलूँ की वही आज भी लागू है लेकिन उसमे ' राजद्रोह ' के लिए दंड है ' देश द्रोह ' के लिए नहीं .जो वकील हैं वे आपको ठीक से समझा देंगे . और मेरी देशभक्ति ' राजद्रोह ' हो और उस का वही दंड हो तो मैं उसके लिए तैयार हूँ और खुद ' इंडिया अगेंस्ट करप्सन 'के बैनर तले सड़क पर उतर चुका हूँ और वादा करता हूँ की मौजूद मिलूंगा . 
 

और मनमोहन तूने  भले ' वंश दानी गुरु दशमेश गोविन्द सिंह ' का चोला पहन रखा हो ,उनके वेश नाम और काम का कलंक है तू .सिंह तो नहीं ही है तू .
थू है तुझ पर !

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Comment by ashutosh kumar barnwal on February 26, 2011 at 6:34pm

sir ,

i agree with u i cannot say lord makale I WILL SAY BADAMAS MAKALE, becausse jab british sarkar fail ho rahi thi ruling mein to un logo ne makale ko pratinidhi bana ke bheja observation ke liye to suniye iska observation isne bharat ke adhayatmik aur boudhik sakti jo tha GURUKUL is per hunt kia tha yaha se jane ke bad usne briten ke parliyament me speech diya ki agar bhartvarsh  ke gurukul system ko agar destroy kia jaye to bahoot kuch safalta milsakti hai,

aur ye sarkar isko aage badane ke liye katibah hai,

 

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