बेटी के हत्या काहे होता। उ लोग बेकुफ ह जे बेटी के पेट मे ही खतम कर देता। आज के समाज पर नज़र दौरावाल जाव त बेटा के जन्म पर जेतना ख़ुशी मनावल जाता ओतने ओकर बियाह भईलापर घर मे कोहराम मच जाता। बियाह होखते बेटा लोग मेहरारू के अंचरा से बंधा जाता लोग। आ मेहरारू भी त केहू के बेटी होखे ले। ओकरा अपना माइ बाप से लगाओ होख्बे करेला त उ त अपन माइ बाप के सेवा करबे करी। आ बेटा के अपना मेहरारू से लगाव होला एह्से मेहरारू के खुश करे खातिर बेटा लोग चल देला अपना सास ससुर के सेवा मे। त फायदा त बेटीये के पैदा करे मे बा। जबसे बेटिया १०-१२ बरिस के होली सं तबे से माइ बाप के सेवा करे लागे ली सं। बेसी घर से बाहर आना जाना भी ना करे ली सं। स्कूल जैहें सं, घरे आइहन सं। टूशन जाए के बा त जैहन सं, घरे आइहन सं। बाक़ी ना बाहर कही आना न जाना। अगर कौनो लडकी मे विशेष कौनो गुन बा जैसे कि नाचना, गाना, बजाना आ चाहे खेले कुदे के त माइये बाप के साथे जैहन सं। अपन क्लास करिहं सं वापस घरे आइहन सं।

बाकी बेटा लोग बिहान होते ही माइ के मुडी पर चढ़ जाला लोग, माइ खाए के दे ओकरा बाद बबुआ कहवा गईलन केहू के पता नइखे। स्कूल गईले आ कि दोस्तन के साथे सिनेमा देखे गईलन आ कि कही आवारा गर्दी करतारन केहू नइखे जानत। घरे लौटी लोग त बुझाई कि एहसान करता लोग । कवनो काम कह दियाव त ऐसे करी लोग कि केतना बड़ा उपकार कईलन हां बबुआ। १०० गो मे कही ए गो निम्नो हो जाला लोग बाकी आज के जमाना मे बहुत कम। हमेसा बाप के मुडी पर सवार कि एह कम्पनी के जूता चाही त एह कम्पनी के पैंट चाही। महतारी बाप के उल्लू बनावे खातिर रोज रोजगार समाचार और प्रतियोगिता दर्पन कीनी लोग बाकी ससुरा सब पढी एको गो ना खाली ताखा पर धरात जाई। १२ वी के परीक्षा देला के बाद तीन चार साल पढ़ाई बंद। पूछ त जबाब मिली कि तैयारी कर तानी। अरे कवन चीज के तैयारी कर तार।

जैसे तैसे बीए,एम् ए कर के कही नौकरी लागी त बियाह के तैयारी शुरू हो जाई। बियाह हो जाई त बस माइ बाप के काम ख़त्म। अब त जे बा से बाबु आ उनकर मेहरारू। मेहरारू जौने रस्ते ले जाई ओही रस्ते बाबु जैहन। मेहरारू जब आपन माइ बाप के सेवा मे लागल रही त मेहरारू के खुश करे खातिर बबुओ लाग जैहन सास ससुर के सेवा मे।

तब फायेदा त बेटिये के जन्मौले मे बा नु। बेटी कुवारो मे सेवा करे ली सं आ बियाहो भईला पर। अपने त करबे करेलिसन अपना दुल्ह्वो से करवैहन सं। त काहे के बेटीयन
के मारल जाओ।

जहाँ तक वंश के चलावला के सवाल बा, आज के जमाना मे केहू से पुछल जाओ कि तू केकर वन्सज हव त मुश्किल से अपना दादा चाहे पर दादा के नाम बता पाई लोग। पांच पुश्त पिछे के पूछ के देख ली हज़ार मे से केहू एक आदमी ठीक ठाक बता पाई। अरे कवन राजा महाराजा के वंश बा जे बेटा ना होई त केहू राज पाट हड़प ली। समझदारी त एह मे बा कि बेटी जन्म ले तिया त लेवे दी। आ जब सब तरफ से सुख दे तिया त सुख भोगी। १०-१२ बरिस के होई तबे से रौवा के सुख देवे लगी और बुढ़ापा मे उ आ ओकर दूल्हा दुनू राउर सहारा आ कहल जाव कि बुढ़ापा के लाठी बनी लोग। मरला के बाद आज ले केहू ई बताव्ले बा कि के स्वर्ग मे गईल और के नरक मे। ई सब बकवास ह। स्वर्ग और नरक एहिजे धरती पर बा। जे सुख शांति से आपन जिन्दगी जी गईल से स्वर्ग के सुख भोग्लस और जे रोवत पीटता से नरक नु भोगता। सब जीव परमात्मा के बनावल ह। ओकर नास् करना परमात्मा के दुःख देना ह। कहल जाला कि भगवान के लाठी मे आवाज़ ना होला। बेटीन के भ्रूण हत्या के सज़ा बहुत लोग के मिलल बा अलग -अलग तरह से। बहुत लोग आज भी भुगत रहल बा। जौन डाक्टर ई हत्या करतारण सं ओह्नियो के भगवान के देल सजाय भुगत रहल बारन सं। बाक़ी आज के समाज के आदमी के आंख नइखे खुलत। बेटी के जन्म से दोहरा फाइदा उ लोग के नइखे लौकत।

कहल जाला :-

"बेटी के माँ रानी, बुढ़ौती मे भरे पानी "
ई ओह जमाना के बात हो गईल जब बेटा लोग 'श्रवण कुमार' होत रहे लोग। अब त

"बेटी के माँ रानी, बुढ़ौती मे महारानी

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बेटिया बेहतर बड़ी बेटा से
इ आप के कथन के हम समर्थन करत बनी! बेटी बेटी होली बेटा ना इ कथन पुरान हो गयेल बा !
आज के बेटी बेटा ना बेटा से भी बढ़ कर बाड़ी! हर कदम साथ निभावे खातिर तैयार रहेली
--
अमित
I have to agree. Its a curse on our society and we have to oppose it. Currently there are slightly more than 900 girls for every 1000 men. Give it a few more years and there will be no girls for boys to marry.
Raur Kathan ke hamhu samarthan karat bani..Betiyan e samaj aaur e Sristhi ke chalawe ke khatir bahute jaroori baran .The Gap in Beta each to beti is widening day by day which will ultimately lead to Disaster some day if we dont change our mindset.
So lets keep the discussion on and spread some positive msg to the society thru YOUBIHAR.
सिर्फ सोच बदलला से कुछ ना होई सोच के साथ- साथ समाज के रहन सहन में भी बदलाव जरूरी बा
आज बेटी पैदा करे से माँ बाप कहे दरत बड़े, बेटी के पालन पोसन के दर से ना उनकर सादी कैसे होई
इ बात के लेके ज्यादा चिंतित रहेले! आज जरुरी बा की हम सब मिलके इ दहेज़ रूपी रावण के दमन करी जा
हम सब के चिंता के बिषय इ बा की बेटा के सादी ना भी होई त कवनो बात नइखे, पर यदि बेटी के सादी ना
होई त का होई, समाज में जियल मुस्किल हो जाई, आरे बेटी के पढाई ओके ओह लायक बने दी की ओ अपना
पाव पर खडा हो सके फिर देखी ओ आप के भी संभाले के ताकत रखिहन, हमर देस माता सीता, सावित्री के साथ-साथ
माँ दुर्गा, काली के भी देश ह!
आप के समर्थन के लिए धन्यबाद
--
अमित
The Gender Gap Review reveals India's dismal position. Out of 134 countres surveyed, India is among the lowest ranked countries at the 114th position.

Only 14 per cent of the companies surveyed, have 40 per cent or more women among their employees. These women employees are mainly present at the entry and middle levels of management, while very few women attain senior management level.

Most companies do not track salary gaps, despite the clear wage gaps between women and men only 4 per cent of the companies surveyed are attempting to monitor salary gaps.

"Women, as half of the human capital of India, will need to be more efficiently integrated into the economy in order to boost India's long-term competitive potential. The World Economic Forum's survey of some of the biggest companies in India shows that, to achieve this integration, Indian companies will need to set targets, improve policies to close salary gaps and promote work-life balance," said Saadia Zahidi, co-author of the Forum's Global Gender Gap Report 2009.

India has closed 93 per cent of its health gender gap, 84 per cent of its education gap, 41 per cent of its economic participation gap and 27 per cent of the political empowerment gender gap according to The Global Gender Gap Report 2009. India's middle class will see rapid growth off a very low base, but the shifts in spending that we outline are likely to remain constrained by women's relatively low status, at least for the next 10 to 15 years.

India holds last place among the BRIC countries on the Index, behind Russia (51), China (60) and Brazil (82). In South Asia, the sub-continent is in second-to-last place behind Sri Lanka and Bangladesh and ahead of Pakistan. Sri Lanka leads in the rankings by far, holding 16th position, followed by Bangladesh (94), Maldives (100), Nepal (110).

The Global Gender Gap Index examines the gap between men and women in four fundamental categories: economic participation and opportunity, educational attainment, political empowerment and health and survival.

Economic Participation and Opportunity: 0.412 (Rank 127)
Educational Attainment: 0.843 (Rank 121)
Health and Survival: 0.931 (Rank 131)
Political Empowerment: 0.273 (Rank 24)
Ability of women to rise to enterprise leadership: 4.84


Report Dated :: 09.11.2009
Raveesh said:
The Gender Gap Review reveals India's dismal position. Out of 134 countres surveyed, India is among the lowest ranked countries at the 114th position.

Only 14 per cent of the companies surveyed, have 40 per cent or more women among their employees. These women employees are mainly present at the entry and middle levels of management, while very few women attain senior management level.

Most companies do not track salary gaps, despite the clear wage gaps between women and men only 4 per cent of the companies surveyed are attempting to monitor salary gaps.

"Women, as half of the human capital of India, will need to be more efficiently integrated into the economy in order to boost India's long-term competitive potential. The World Economic Forum's survey of some of the biggest companies in India shows that, to achieve this integration, Indian companies will need to set targets, improve policies to close salary gaps and promote work-life balance," said Saadia Zahidi, co-author of the Forum's Global Gender Gap Report 2009.

India has closed 93 per cent of its health gender gap, 84 per cent of its education gap, 41 per cent of its economic participation gap and 27 per cent of the political empowerment gender gap according to The Global Gender Gap Report 2009. India's middle class will see rapid growth off a very low base, but the shifts in spending that we outline are likely to remain constrained by women's relatively low status, at least for the next 10 to 15 years.

India holds last place among the BRIC countries on the Index, behind Russia (51), China (60) and Brazil (82). In South Asia, the sub-continent is in second-to-last place behind Sri Lanka and Bangladesh and ahead of Pakistan. Sri Lanka leads in the rankings by far, holding 16th position, followed by Bangladesh (94), Maldives (100), Nepal (110).

The Global Gender Gap Index examines the gap between men and women in four fundamental categories: economic participation and opportunity, educational attainment, political empowerment and health and survival.

Economic Participation and Opportunity: 0.412 (Rank 127)
Educational Attainment: 0.843 (Rank 121)
Health and Survival: 0.931 (Rank 131)
Political Empowerment: 0.273 (Rank 24)
Ability of women to rise to enterprise leadership: 4.84


Report Dated :: 09.11.2009



No Compare to male...she is great
now things have been improving......but not enough....still we all need to improve.first of all we should have to change our mentaility,give same space as like boy.we need to show our society that ya i m changed now its ur turn !!!
thanx nitesh

nitesh kumar said:
now things have been improving......but not enough....still we all need to improve.first of all we should have to change our mentaility,give same space as like boy.we need to show our society that ya i m changed now its ur turn !!!
daughter and son are both equal but due the insufficient knowledge people kill them they know very well the importance of girl because a girl is a mother, a wife and a sister also but for marriage people have to spent a lot of money for the good future of a girl sothey kill them it is a curse on us and we should take first step to stop this so we allhave to take step o prevent this
rashmi jee! apne is social issue ko bahut hi behatarin tarike se samne rakha hai. amit kumar jee ke vichar bhi sahi hai. aj hum chah kar bhi samaj mein mahilaon ko unka sthan nahi dila pa rahe hai. shayad mai abhi vishay se bhatak raha hun.....
anyway log beti ko pasand nahi karte,karan
1. betiyon ki samaj mein suraksha sunischit karne mein hamara system saksham nahi.mahilaon ke prati barhta apradh aur saja ki kam dar,badnami jyada....
2. chher-chhar ki ghatnayein, ashlil comments,shayad "pratigya" nam ki koi dharawahik is par vishes prakash dalti hai...
3. dahej lene walo ko ijjat ki drishti se dekha jana, adi kai karan


magar hamare jaise yuva ise badal ke rakh denge, aj mai yuvaon se ahwan karta hun ki O samne aye aur agar jaroorat pare to mata-pita ki awagya kar ke bhi dahej virodhi shadi hi karein. jahan chher-chhar ya aisi koi ghatna ho uska jam kar virodh karein . ho sakta hai aise mein jaan bhi gawani pare magar is se dare nahi.. Dahej lene walo par comment kasa jaye tatha use adar karna chhor diya jaye..... mai janta hun ki is raste par chalne ke liye bahut kam log taiyar honge,magar mai Har manane wala nahi.... mai apne param mitra aparajey kumar ke sath is mission par chal para hun....... mere mitra aparajey Air force mein hai aur mai railway mein, pariwar tatha riste-natedar hamare faisle ko uchit nahi mante.....
fir bhi hum isi raste par chalenge,,,,,
hum unlogo ko pranam nahi karte jo dahej lekar shadi karte hai aur mahilaon ke samman ke viprit acharan karte hue samvidhan ke anuchhed 51A(e) ka ullanghan karte hai.... samaj prachalit vartman pratha ko tyagte hue niyam banaya jaye ki var ke pita jee kanya ke pita jee ko uncha sthan de aur unse angeya(kuchh rupaye aur lota mein pani dene ki vidha) mange.....

aur bhi kai sujhao diye jane chahiye aur is par sabhi ko amal karte hue garv kiya jana chahiye.....


Dksmart
IAS aspirant
Bhojpur(ara)
good ...................very good
samaj ko aapke jaise hi noujawano ki jarurat hai.

Dksmart said:
rashmi jee! apne is social issue ko bahut hi behatarin tarike se samne rakha hai. amit kumar jee ke vichar bhi sahi hai. aj hum chah kar bhi samaj mein mahilaon ko unka sthan nahi dila pa rahe hai. shayad mai abhi vishay se bhatak raha hun.....
anyway log beti ko pasand nahi karte,karan
1. betiyon ki samaj mein suraksha sunischit karne mein hamara system saksham nahi.mahilaon ke prati barhta apradh aur saja ki kam dar,badnami jyada....
2. chher-chhar ki ghatnayein, ashlil comments,shayad "pratigya" nam ki koi dharawahik is par vishes prakash dalti hai...
3. dahej lene walo ko ijjat ki drishti se dekha jana, adi kai karan


magar hamare jaise yuva ise badal ke rakh denge, aj mai yuvaon se ahwan karta hun ki O samne aye aur agar jaroorat pare to mata-pita ki awagya kar ke bhi dahej virodhi shadi hi karein. jahan chher-chhar ya aisi koi ghatna ho uska jam kar virodh karein . ho sakta hai aise mein jaan bhi gawani pare magar is se dare nahi.. Dahej lene walo par comment kasa jaye tatha use adar karna chhor diya jaye..... mai janta hun ki is raste par chalne ke liye bahut kam log taiyar honge,magar mai Har manane wala nahi.... mai apne param mitra aparajey kumar ke sath is mission par chal para hun....... mere mitra aparajey Air force mein hai aur mai railway mein, pariwar tatha riste-natedar hamare faisle ko uchit nahi mante.....
fir bhi hum isi raste par chalenge,,,,,
hum unlogo ko pranam nahi karte jo dahej lekar shadi karte hai aur mahilaon ke samman ke viprit acharan karte hue samvidhan ke anuchhed 51A(e) ka ullanghan karte hai.... samaj prachalit vartman pratha ko tyagte hue niyam banaya jaye ki var ke pita jee kanya ke pita jee ko uncha sthan de aur unse angeya(kuchh rupaye aur lota mein pani dene ki vidha) mange.....

aur bhi kai sujhao diye jane chahiye aur is par sabhi ko amal karte hue garv kiya jana chahiye.....


Dksmart
IAS aspirant
Bhojpur(ara)

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