क्या कहें , किस से कहें ,कैसे कहें ............या ना कहें !

मैं शायिरी भी करता हूँ और मेरे कुछ दोस्तों ने शराफत में कहा भी है कि " हाँ ठीक ठाक ही लिख लेते हो "  हमारे जैसे अभागे उम्मीद करते ही रह जाते हैं कि कोई कहे कि हाँ  उम्दा लिखा है .तो आज भी ऐसी उम्मीद पाले हूँ पर नाउम्मीदी से गुरेज भी नहीं रहा .

लेकिन आज शायिरी नहीं सुनाने जा रहा . जो कहने जा रहा हूँ वह ऐसा है , सच है , कि शायिरी नहीं बन सकता . क्योंकि वो मेरी विनम्र साफगोई ही होगी .......... शायद !

हम ' यू बिहार हैं '. हम  ' हम बिहार ' नहीं बन सकते ? मेरा अपना ख्याल है कि हम सब  आये तो हैं अपनी यही  पहचान लेकर .सच कहूं पहचान से ज्यादा प्यार लेकर .याकि ऐसा हो .

अगर कोई दो व्यक्ति सम्पूर्ण एकमत हों तो निश्चित है एक मूर्ख होगा या ज्यादा संभावना है दोनों ही हों.या दोनों संत हों .किसी का हो तो है मेरा नहीं है ऐसा कोई दावा.अतः असहमति सहज है .अनिवार्य भी !सोद्देस भी .कम से कम उद्देस और लक्ष ' व्यक्तिगत ' तो .............. तो न बने ! 

लेकिन वह असहमति कैसी हो और उसका स्वरुप क्या हो .सीमा क्या हो . तय नहीं किये जा सकते ! या कम से कम तर्जेबयानी........................ ?

मैं कुछ एक से असहमत होने पर अपनी लक्षमण रेखा पार कर गया .नहीं होना चाहिए था .पर हुआ . ऐसा नहीं हो , कुछ सोचें ?

लेकिन उस से पहले ये सोचें कि एक बात पर हम सभी सहमत हैं .अगर असहमत हैं तो फिर यहाँ क्यूं हैं ? हम सब सहमत हैं कि हम बिहार से प्यार करते हैं .यह सहमती और सब असहमतियों पर भारी नहीं पड़ सकती ?

कोशिश तो करें .बिना गिला शिकवा किये ज्यादा . बाकी आप कहें .कभी लगेगा कि कहना चाहिए या सहमत असहमत होना चाहिए तो आपके बीच मैं हमेशा रहूँगा ही .

शालू जी तो हैं ही !



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जन मंच का यही प्राक्कथन है कि हम असहमत होने के लिये सहमत हैं| कोई दो राय नहीं, कोई शक-ओ-शुबहा नहीं|
पर जब हम मुद्दों से ऊपर होकर अपने आप की प्रतिस्थापना करने में मशगुल हो जायें और व्यक्तिगत प्रतियोगिता में संलिप्त हो जायें, तो उपरोक्त सहमति गले की हड्डी बन जाती है| अब गले में खराश आये तो खांसना वाजिब है|
समस्या अपनी घर की हो तो बाहर वाले क्या खाक राय करेंगे! कुछ अरसे से बंधुगन यही सिद्ध करने में लगे हैं कि वो घर नहीं वरन बाहर वाले हैं| उनकी लेखनी कुछ ऐसी ही संकेत देती हैं मानो उनकी पैदाइश गलती से बिहार में हो गयी हो लेकिन वो परदेशी हैं| इस आपा-धापी में वो भूल गये कि पूरी यू-बिहार की जनता खांटी देशी है और उन्हें देशी समाधान ही प्यारी है|
अतः ऐसे महानुभावों से करबद्ध निवेदन है कि वे बिहार और इसकी समस्याओं पर अवश्य बोलें पर एक देशी की तरह वाद-विवाद करें तो श्रेयष्कर होगा| जहाँ तक भईयों की राय-विचार का प्रश्न है, वो तो हमारे सर-आँखों पर|
 अच्छा लगा , समझ मे आया कि आप क्या केहना चाहते हैं। लेकिन कभी कभी संदेह पैदा होता है कि क्या सभी युबिहार के सदस्य बिहार से प्यार करते हैं इसिलिये उन्होने युबिहार ज्वैन किया है। 
      लेकिन चलिये आपकी बातों पर ध्यान देते हुए इन सभी चिजों को नजर अंदाज करते हैं और उस लहर मे शामिल होते हैं जो बिहार को और  हम जैसे बिहारियों को दुनिया के सामने सम्मान दिलयेगा। 
         ।।।  जय बिहार जय भारत ।।।  
मुकुंद  जी ! बहुत सही कहा .लहर बन जाएँ .और प्रतिलाहरों को भी अपनाते हुए प्रवेग बने !
जो भी घर आया हुआ हो घर का है . या फिर मेहमान मान कर चलो .अपने आप अपना हो जायेगा . यार मैं भी तो ' भगोड़ा ' रहा दशकों तक :) .

Abhishek said:
जन मंच का यही प्राक्कथन है कि हम असहमत होने के लिये सहमत हैं| कोई दो राय नहीं, कोई शक-ओ-शुबहा नहीं|
पर जब हम मुद्दों से ऊपर होकर अपने आप की प्रतिस्थापना करने में मशगुल हो जायें और व्यक्तिगत प्रतियोगिता में संलिप्त हो जायें, तो उपरोक्त सहमति गले की हड्डी बन जाती है| अब गले में खराश आये तो खांसना वाजिब है|
समस्या अपनी घर की हो तो बाहर वाले क्या खाक राय करेंगे! कुछ अरसे से बंधुगन यही सिद्ध करने में लगे हैं कि वो घर नहीं वरन बाहर वाले हैं| उनकी लेखनी कुछ ऐसी ही संकेत देती हैं मानो उनकी पैदाइश गलती से बिहार में हो गयी हो लेकिन वो परदेशी हैं| इस आपा-धापी में वो भूल गये कि पूरी यू-बिहार की जनता खांटी देशी है और उन्हें देशी समाधान ही प्यारी है|
अतः ऐसे महानुभावों से करबद्ध निवेदन है कि वे बिहार और इसकी समस्याओं पर अवश्य बोलें पर एक देशी की तरह वाद-विवाद करें तो श्रेयष्कर होगा| जहाँ तक भईयों की राय-विचार का प्रश्न है, वो तो हमारे सर-आँखों पर|

Its a healthy sign for any forum that people disagree on things. Its important that we disagree also- this helps brainstorming and above all we can not agree on every issue. In the heat of moment at times we pull eachother's legs too, that's not unusual and wrong. Everyone wants to put his mind across to others in his/her own way and at times we cross the line.There are many learned people here with various different backgrounds and hence different opinions on issues. Lets agree to disagree on issues; also lets learn to ignore unpleasant remarks of our fellow bloggers as much as possible.Ones in a while taking dig at each other or playing banter is natural and also a healthy practice, It creates unpleasant atmosphere to make personal attacks on fellow bloggers-lets avoid this.

So correctly put by you sir, that we are in this forum under one umbrella itself is a proof that something unites us to be here- that is love for our state, our culture.

I have no intention to preach anyone, hope everyone will take it in right spirit. 

ये आपका बड़प्पन है सिंघजी| और मैं तो कहता हूँ दूसरों से अपनी इज्ज़त करवाना कोई आपसे सीखे| आप अपनी बात रखते हैं और असहमति के क्षणों में साफगोयी दिखाते हैं| आप व्यक्तिगत और नस्लवादी कटाक्ष में संलिप्त नहीं होते| आप एक बेंच-मार्क हैं आपके हम-उम्र और समकक्षीय साथियों के लिये| और खासकर उन साथियों के लिये जिन्होंने एक लम्बा अरसा सात-समुन्दर पार बिताया है तथा अब स्थानीय व तात्कालिक जीवन-शैली और विचार के गुलाम हुए जान पड़ते हैं| यदि ऐसा ही है तो वापस बिहारीपन का लोभ क्यों? जहाँ है और जैसे भी है, वहीँ खुश क्यों नहीं रहते! मनोविज्ञान की भाषा में इसे वजूद की असुरक्षा की भावना कहते है| कुछ हलकी भाषा का प्रयोग करें तो ये ऐसा है कि " ना खुदा ही मिला, ना रिसाले सनम; ना इधर के रहे, ना उधर के रहे"|

RAJKUMAR SINGH said:
जो भी घर आया हुआ हो घर का है . या फिर मेहमान मान कर चलो .अपने आप अपना हो जायेगा . यार मैं भी तो ' भगोड़ा ' रहा दशकों तक :) .

Abhishek said:
जन मंच का यही प्राक्कथन है कि हम असहमत होने के लिये सहमत हैं| कोई दो राय नहीं, कोई शक-ओ-शुबहा नहीं|
पर जब हम मुद्दों से ऊपर होकर अपने आप की प्रतिस्थापना करने में मशगुल हो जायें और व्यक्तिगत प्रतियोगिता में संलिप्त हो जायें, तो उपरोक्त सहमति गले की हड्डी बन जाती है| अब गले में खराश आये तो खांसना वाजिब है|
समस्या अपनी घर की हो तो बाहर वाले क्या खाक राय करेंगे! कुछ अरसे से बंधुगन यही सिद्ध करने में लगे हैं कि वो घर नहीं वरन बाहर वाले हैं| उनकी लेखनी कुछ ऐसी ही संकेत देती हैं मानो उनकी पैदाइश गलती से बिहार में हो गयी हो लेकिन वो परदेशी हैं| इस आपा-धापी में वो भूल गये कि पूरी यू-बिहार की जनता खांटी देशी है और उन्हें देशी समाधान ही प्यारी है|
अतः ऐसे महानुभावों से करबद्ध निवेदन है कि वे बिहार और इसकी समस्याओं पर अवश्य बोलें पर एक देशी की तरह वाद-विवाद करें तो श्रेयष्कर होगा| जहाँ तक भईयों की राय-विचार का प्रश्न है, वो तो हमारे सर-आँखों पर|

Dr.Ajay Kumar jee ,

Vaise to jo main kahna chahta hoon Shri Randheer Mishra jee ne kafee kuchh kah diya hai . Fir bhee sirf yah jodna chahunga ki yah manch Bihar ka prabuddh chehra hai . Khas kar ham abhilasha to yahee karte hain .Karan jo log computer aur net kee duniyan se jude hain vo kam se kam is gareeb matee kee vo santane hain jo ki kaha jaye to itne ' priviledged ' to hain hee ki unkee jo bhee prishthbhumi ho , karodon biharion se jyada hasil kiye huye hain .ham me se shayad hee koyee dawa kar sake ki unke nirman me is matee ne kuchh kharch naheen kiya ho ya unkee apnee ' swanirmiti ' me bhee uska koyee yogdan na ho .atah kisee bhasan ka sahara na lekar itna hee kahoonga ki us karz ko bas yad hee rakh saken to bhee ham apne uddes ke marg par hee milenge.

Apnee kamiyan ham me se kaun naheen janta ? aur haan apnee takat ka poora ehsas kar len to fir ' pawansut ' kee tarah koyee kam asambhav naheen rah payega .Aur mera poorn vishwas hai ki ' BIHAR ' saksham hai , haan shayad uskee takat ka ehsas dilane ke liye ' Jamvant ' chahiye. Aur mera manna hai ki apnee vyaktigat sakshamata ka ,vah chahe jis roop me ho ,thoda sa ansh bhee is matee ko de saken to yah hanuman ' BIHAR ' aasman ko chhoo sakta hai kyonki iska itihas Sooraj tak ko maap lene ka raha hai .

Sirf Dasha hee naheen Disha bhee nischit karnee hai  .matantar ke bawjood yah to avivadit hee hai ki har manushy ko jeene ka moolbhoot adhikar milna hee chahiye .mera manna hai ki vah maulik adhikar ' ROTEE ,KAPDA , MAKAN , SIKSHA , SWASTHY ,NYAY aur manaveey SAMMAN ' hee hai .gair barabaree ab tak manushy ke itihas ka hissa rahee hai aage bhee rahegee kyonki ' prakriti ' hee uska srot hai .aap daktar hain to batane kee jaroorat naheen kee judwa bachchon ke bhee gundharm alag bhee na hon to anguliyon ke nishan to alag hote hee hain .

lekin ' vyakti aur samasthi ' yane samaj kee sampoorakta aur paraspar avalamban  hee poore samaj ko paribhashit karta hai .aur vahee antarsambandh tatha usme nihit uttardayitva hee uskee neenv hain . sabko barabaree de sake samaj vah utopian parikalpana hai par usko pane ka prayas to naheen chhoda ja sakta . hamara itihas bhayankartam gairbarabaree ka itihas raha hai .Manav dwara Manav ke shoshan hee naheen gulamee ka ' sansthagat ' itihas .Us se mukti ke bina koyee ' Bhavishy ' ham soch hee naheen sakte .sochna hee ' ADHARM ' hoga apne hee bataye gaye ' dharm ' kee paribhasha kee kasautee par .

Mana ki us gair barabaree ko door karne ke tamam  sahee bhee aur kuchh tathakathit sahee ' Prayas ' ,tathakathit ' Azadee ke baad kiye bhee gaye .lekin uske kuchh achchhe nateeje bhee aaye aur kuchh to ' kutsit ' shrenee me badal gaye .yah sanvaad aur vivaad dono ka vishay ban sakta hai .par sanvaad se hee sahmati nikal saktee hai aur marg aur manzil bhee .vivad se dooree hee naheen badhtee ,vyaktigat vaimanasy ke bhee khatre badh jate hain aur aksar akaran hee .koyee naheen kah sakta ki hamare ' tark ' hamare ' aham ' ka hissa hote hee naheen .

Isliye sanvaad bane rahne ke liye main jarooree manta hoon ki kam se kam hamaree tarkikta hamare ' Aham ' se jitnee mukt ho utna achchha .Aur saaf kahoon to hamaree baat se hamara ' Tark ' to dikhe lekin kisee ko bhee usme ahankar dikhe ( bhale galat hee dikh raha ho ) to us se bachne kee koshish kee jaye .Bhale hee uska matlab ' DEBATE ' harna hee kyon na ho .

 

isee liye maine yah kahne kee koshish kee hai ki har bat kahnee jarooree hee naheen hoti to sochen ki ' KYA KAHEN '

Har vyakti kee samajh ,gyan ,anubhav ,sanskar , swabhav , upbringing vagairah alag ho sakte hain isliye ' common ground ' ke abhav me kuchh kaha gaya vyarth hee hoga .Vishes kar yadi koyee ' poorvagrah ' ho kisee me to.Atah ' KIS SE KAHEN ' yah bhee jarooree hai .( ya ye ki jan liya jaye ki kis se na kahen ) .

' KAISE KAHEN ' yah har ek ka apna adhikar to hai par us se bhee badh kar kartavy bhee ho kuchh .' naa brooyat apriyam satyam ' kee neenv par to sant jan bhee fail ho jate hain ,ham to samany jan hain .Fir bhee repeat karoonga ki ' vyaktigat vidvesh ' aur apmanjanak ' ukti ' se bachen aur vahee mere ' YAA NAA KAHEN ' ka aashay hai .Bach kar nikal lena bhee ' BINA KAHE ' ek art hee hai aur uska upyog karna Parajay naheen Sajjanata hee hai khas vakton par .

Maun bhee hamesha na ' Sweekriti ' hota hai naa ' Palayan ' hee .

 

aasha hai ki apnee baat aapke samne rakh dee hai .Lekin yah mera apna nazariya hee hai .Meree aukat naheen hai ki ise ' Bandhankaree ' kahoon .Is ka niyaman to ham sab mil kar hee kar sakte hain .

 

Sarv sammati se ho to baat hee kya hai !

  

Dr. Ajay Kumar said:

Rajkumarji, Aap kahna kya chaahtey hain ? Kripya saff saff dhang sey hahen.
Randheer jee , I am thrilled to find me in the same ' WAVE ' and spirit .

Randhir Mishra said:

Its a healthy sign for any forum that people disagree on things. Its important that we disagree also- this helps brainstorming and above all we can not agree on every issue. In the heat of moment at times we pull eachother's legs too, that's not unusual and wrong. Everyone wants to put his mind across to others in his/her own way and at times we cross the line.There are many learned people here with various different backgrounds and hence different opinions on issues. Lets agree to disagree on issues; also lets learn to ignore unpleasant remarks of our fellow bloggers as much as possible.Ones in a while taking dig at each other or playing banter is natural and also a healthy practice, It creates unpleasant atmosphere to make personal attacks on fellow bloggers-lets avoid this.

So correctly put by you sir, that we are in this forum under one umbrella itself is a proof that something unites us to be here- that is love for our state, our culture.

I have no intention to preach anyone, hope everyone will take it in right spirit. 

Raj Kumar ji - yours words fetch respect and a gesture to replicate and hope I may carry forward to the maximum. Atithi devo bhava is our culture and same is being carried even today. If Guest becomes ghost or devil then please suggest us how to treat or deal with the situation.

 

I have great admiration for you and your thoughts.

Thanks SHYAM JEE !

Aur bhayya koyee ' sooyee ko talwar bataye ' to use ' charan vidha ' ka hasya maan kar manoranjan ka lutf uthaya ja sakta hai . hansaa jaye bas .LALOO CHALISA TO PADHA HEE HOGA :) .

Haan JAI BIHAR bol raha ho kya itna hee kafee naheen hai . kam hai ? Haan kalam tudayee kee moorkhta na karne lagen ham log , ek bar sanket kar kah dene ke baad .Fir koyee ' Gyan aur Buddhatv ' ka Mukut khud ko pahnaye ghoomta rahe to ghoomta rahe . vah bhee manoranjan hee hoga !

Shyam N Singh said:

RajKumar ji ,your explanation is so apt and conclusive.

One can always use hard hitting expressions if it is balanced and with in the limits of dignity for every body.We all have right to call a spade as spade but describing a needle as sword will be far fetched imagination.   

There is not a single day in my life of 51 years that I am not proud of being a Bihari that too from district of Arrah.Many a times it makes me more proud when I look at some other people here in Pune, Maharashtra.

I will not call you 'bhagoda', time and ambitions do take a person to different shores.It makes one a better person in every respect.

Happy New Year 2011.

THAKS ANIL ,

GHOST or DEVIL ?

तो  फिर  मौन  ' शांति  यज्ञं  ' .

अनुभवी  भव !

 



Anil Kumar Giri said:

Raj Kumar ji - yours words fetch respect and a gesture to replicate and hope I may carry forward to the maximum. Atithi devo bhava is our culture and same is being carried even today. If Guest becomes ghost or devil then please suggest us how to treat or deal with the situation.

 

I have great admiration for you and your thoughts.

thanks Dr. Sahab .

Dr. Ajay Kumar said:


RAJKUMAR SINGH said:

THAKS ANIL ,

GHOST or DEVIL ?

तो  फिर  मौन  ' शांति  यज्ञं  ' .

अनुभवी  भव !

 

THIS IS CALLED WISDOM OF INDIA AKA SRI RAJKUMAR SINGH

I LOVE IT, RAJKUMAR SINGH JI

EXCELLENT.

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